Friday, October 7, 2016

*"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"*

*"प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली"*
पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!
*धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!*
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!
*ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!*
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!
*प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!*
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!
*ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!*
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!!
*भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!*
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!
*प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!*
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!
*प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!*
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!
*भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!*
डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!
*घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!*
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!
*अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!*
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!!
*रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!*
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!!
*सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!*
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश!!
*देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!*
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल^^
*दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!*
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!
*सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!*
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!
*भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!*
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!
*अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!*
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!
*पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!*
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!
*अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!*
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!
*फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!*
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!
*चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!*
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!
*रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!*
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!
*भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!*
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!
*लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!*
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!
*चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !*
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!
*सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!*
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!
*सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!*
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!
*हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!*
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!
*अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!*
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!
*तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!*
मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग। 🌸
*कृपया इस जानकारी को जरूर आगे बढ़ाएं

Wednesday, March 16, 2016

चतुर्थ रैगर महासम्‍मेलन 6, 7 अक्‍टूबर, 1984 को जयपुर में

इस महासम्‍मेलन का अयोजन 6, 7 अक्‍टूबर, 1984 को जयपुर में बुलाना निश्चित हुआ । इस महासम्‍मेनल का महत्‍व रैगर समाज के लिए बहुत अधिक था क्‍योंकि 20 वर्षों के लम्‍बे अंतराल के बाद इस महासम्‍मेलन का आयोजन होने जा रहा था । रैगर समाज की गरिमा को चार चाँद लगाने के लिए श्री धर्मदास शास्‍त्री संसद सदस्‍य के विशेष प्रयास से भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने इस सम्‍मेलन को सम्‍बोधित करने के लिए जयपुर पधारी । भारत के कौने-कौने से रैगर बन्‍धु हजारों की संख्‍या में इस सम्‍मेलन में उपस्थित हुए । महासभा के प्रधान श्री छोगालाल कंवरिया भू.पू. चिकित्‍सा मंत्री (राजस्‍थान) की अध्‍यक्षता में 6 अक्‍टूम्‍बर, 1984 को विश्‍व नेता भारत की प्रधान मंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने रामनिवास बाग, मेडीकल कॉलेज ग्राउण्‍ड में इस विशाल सम्‍मेलन को सम्‍बोधित किया तथा अपने भाषण में देश की आजादी के लिए रैगर समाज के द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की । रैगर समाज कभी भी इन्दिरा गाँधी की इस उदारता को नहीं भूला पायेगा । इसमें श्री शिवचरण माथुर, मुख्‍यमंत्री राजस्‍थान मुख्‍य अतिथि थे । उन्‍होंने रैगर समाज के उत्‍थान के लिए यथा सम्‍भव सहायता प्रदान करने का वचन दिया । इस महासम्‍मेलन में राजनैतिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवम् सामाजिक समस्‍याओं पर विचार किया गया । यह सम्‍मेलन एक अभूतपूर्व और सफल सम्‍मेलन था । इस सम्‍मेलन के पदाधिकारी इस प्रकार थे-

स्‍वागताध्‍यक्षश्री धर्मदास शास्‍त्री, संसद सदस्‍य
अध्‍यक्षश्री छोगालाल कंवरिया, भू.पू. चिकित्‍सा मंत्री (राज)
महामंत्रीश्री भगवान दास खोरवाल
 श्री देवेन्‍द्र कुमार चान्‍दोलिया
श्री सुआ लाल तंवर
श्री रामचन्‍द्र धूड़िया
प्रचार मंत्रीश्री सर्यमल मौर्य, भू.पू. विधायक (राजस्‍थान)
उपाध्‍यक्षश्री खुशहाल चन्‍द मोहनपुरिया
 श्री चम्‍पालाल आर्य, विधायक (मध्‍यप्रदेश)
श्री हजारीलाल बाकोलिया, भू.पू. विधायक (राजस्‍थान)
श्री मेघाराम बोकोलिया
श्री गोपीलाल सालोदिया
श्री मोतीराम बालोदिया
श्री पूरनचन्‍द धोलखेड़िया
कोषाध्‍यक्षश्री हरदीन लाला कोमल

एवंम् निम्‍नलिखित प्रमुख नेताओं एवं बुद्धिजीवियों सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विशाल जन समूह की उपस्थिति में राजनैतिक, आर्थिक, क्षेक्षिणिक एवं सामाजिक समस्‍याओं पर विचार किया गया ।
1. बिरदाराम फलवाड़िया, संसद सदस्‍य, राजस्‍थान
2. छोगालाल बोकोलिया, ऊर्जा उपमंत्री, राजस्‍थान
3. धाराराम फलवाड़िया, विधायक, राजस्‍थान
4. चुन्‍नीराम जैलिया
5. श्रीमती सुन्‍दरदेवी नवल प्रभाकर, सदस्‍य, दिल्‍ली महानगर परिष्‍द
6. श्री मोतीलाल बोकोलिया, सदस्‍य, दिल्‍ली महानगर परिषद
7. श्री भोरेलाल शास्‍त्री, सदस्‍य दिल्‍ली महानगर परिषद

Jaipur Raigar Mahasammelan 1984

       चतुर्थ अखिल भारतीय रैगर महासम्‍मेलन के कार्य संचालन हेतु गठित की गई समितियाँ एवम् उनके संयोजक निम्‍नानुसार थे-

समन्‍वयश्री छोगाराम बाकोलिया
 श्री रामचन्‍द्र गोस्‍वामी
महिला संगठनश्रीमती सुन्‍दरवती नवल प्रभाकर
धन संग्रहश्री चिरंजीलाल बाकोलिया
 श्री भागीरथ धोलखेड़िया
विषय प्रस्‍तावश्री खुशहालचन्‍द मोहनपुरिया
कार्यगतिश्री मोतीलाल बाकोलिया
मंचश्री भौंरीलाल शास्‍त्री
स्‍मारिकाश्री राजेन्‍द्र प्रसाद गाडेगांवलिया
पंडालश्री लक्ष्‍मीनारायण खोरवाल
 श्री किशनलाल जाटोलिया
आवासश्री उमरावमल गुसाईवाल
 श्री घासीराम पीपलीवाल
भोजनश्री जगदीश कुमार हिंगोनिया
जलूसश्री किशनलाल कुरड़िया
जल समितिश्री भौंरेलाल सिंद्धान्‍त शास्‍त्री
यातायातश्री छीतरमल मौर्य
सेवादलश्री चन्‍दनसिंह चान्‍दोलिया
बैज बैनरश्री प्रभुदयाल मौर्य
नगर सजावटश्री कल्‍याणदास पीपलीवाल
 श्री जीवनदास मौर्य
प्रेस प्रसारणश्री बिहारीलाल जागृत
युवा संगठनश्री कालूराम आर्य

      इस महासम्‍मेलन में लगभग 12 लाख रैगर बंधुओं ने भाग लिया और अनेक प्रस्‍ताव पारित किये गए जिनमें मुख्‍य प्रस्‍ताव इस प्रकार थे-
1. राष्‍ट्रीय एकता और अखण्‍डता में सरकार का समर्थन देना ।
2. श्रीमती इन्दिरा गांधी की उपस्थिति में श्री शिवचरण माथुर द्वारा चमड़ा उद्योग विकसित करने के आश्‍वासन पर एक चमड़ा उद्योग स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव ।
3. बाल विवाह का विरोध करना ।
4. दहेज प्रथा पर रोक लगाना ।
5. महिलाओं की शिक्षा पर जोर देना ।

      श्री धर्मदास शास्‍त्री ने अपने भाषण में रैगर समाज द्वारा सरकार को पूरा समर्थन तथा इसकी अखण्‍डता के लिए हमेशा तत्‍पर रहने का आश्‍वासन दिया । जनसमूह ने श्री धर्मदास शास्‍त्री को सर्वसम्‍मति से अखिल भारतीय रैगर महासभा का अध्‍यक्ष मनोनित किया । इस महासम्‍मेलन के मुख्‍य उद्देश्‍य रैगर समाज को देश भक्ति की प्रेरणा देना, शिक्षा को तीव्र गति से समाज के पिछड़े भाग में विकसीत करना, रीति-रिवाजों तथा दहेज आदि पर व्‍यय न करना, बाल विवाह प्रथा पर रोक लगाना और विध्‍वा विवाह को प्रोत्‍साहन देना आदि रहे हैं । कुल मिलाकर यह सम्‍मेलन भी पूर्णत: सफल रहा व यह सम्‍मेलन रैगर जाति का एक ऐतिहासिक सम्‍मेलन था ।

Friday, September 4, 2015

रेगर समाज अपनी स्वतंन्त्र पहचान नही बना पाया

विकास के दौर मे जहां लोग चांद सितारे छुने की बात करते है वहीं आज भी हम पुराने रीति रिवाजों से जकडे हुये है। विकास के नाम पर सिर्फ और सिर्फ बातें व एक दूसरे पर छिटाकशी के सिवाय कुछ नही।
भारतीय समाज मे रेगर समाज अपनी स्वतंन्त्र पहचान नही बना पाया, रेगर समाज का कई समूह में विभाजित होना। जिसमे कुछ कारण निम्न हैे।
१. सरकारी व गैरसरकारी कामकाजी लोग रोजी रोटी व परिवार को छोड सामाजिक सेवा नहीं देते।
२. शिक्षित नोजवान जिसे पढाई से ही समय नही निकल पाते।
३. धनी, उच्च शिक्षित, उच्च पद आसीन व जागरूक बन्धु अपनी हैसियत बनाने मे व्यस्त है और जो समाज से जुडे वह केवल महासभा के चुनाव तक सिमित रहे।
४. एक तबका रेगर विकास के नाम पर कुछ लोग ऐसे भी है जो केवल साल में एक दिन (दोज) व सामुहिक सम्मेलनो से अपनी राजनेतिक रोटियां सेकने मे मगन है। रेगर विकास से की ए.बी.सी-डी नही पता बस अपना विकास करना जानते है।
५. अशिक्षित बन्धु जो कुछ अपनी बात कहने व समाज का विकास करने में कमजोर हे।
६ आर्थिक स्थिती से कमजोर बन्धु अपनी रोजी रोटी कमाने मे व्यस्त है।
७. संधर्षवान जो कुछ समझता है और करना चाहता है लेकिन उसे किसी प्रकार का साथ नही मिलता और वो हारकर हताश हो जाता है।
लेकिन इसके बावजूद रेगर समाज में कुछ शेर दिल समाज सुधारक ऐसे भी है जो हार नही मानते और समाज को नई उचाईयो पर ले जाने के लिए संघर्ष कर रहे है। हमारे संत समाज सुधारक इसमें अहम भूमिका निभा रहे है, साथ ही समाज के नौजवान समाज को विकासशील बनाने के लिए संघर्ष करने को तैयार है। समाज के सभी संघर्ष कार्य कर्ताओ को मेरा नमन।
आप इस विषय पर अपनी राय रखना चाहै जरूर लिखे।

Saturday, August 29, 2015

raghubir singh gadegaonlia

रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया 

Monday, July 6, 2015

ढोला, ढोल मंजीरा ओ ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे

ढोला, ढोल मंजीरा
ओ ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ए ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे हो
ए ए ए ए, साँठ कळी को घाघरो जी, कळी कळी में घेर
साँठ कळी को घाघरो जी, कळी कळी में घेर
पहर बजारा निकळी, रुपिया रो हो ग्यो ढेर
ढोला, ढोल मंजीरा
ओ ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ए ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे हो हो
ए ए ए ए, मैं ढोला थने घणी कही के परदेशाँ मत जाय
मैं ढोला थने घणी कही जी परदेशाँ मत जाय
परदेशाँ री पर नारीयाँ सुं नैणों मति लगाय
ढोला, ढोल मंजीरा
ओ ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ए ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे हो हो
ए ए ए ए, चार चौमाखी सोरती जी, रेल गाँव को हात
चार चौमाखी सोरती जी, रेल गाँव को हात
बेगा आजो सायबा मैं जो रही छुन बाट
ढोला, ढोल मंजीरा
ओ ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ए ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे हो हो
ए ए ए ए, डूंगर ऊपर डूंगरी जी, सोनू घडे सुनार
डूंगर ऊपर डूंगरी जी, सोनू घडे सुनार
याँ घड दे म्हारी बाझणी, कोई पायल री झणकार
ढोला, ढोल मंजीरा
ओ ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ए ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे हो हो
ए ए ए ए, बारा का बाजार में कोई बुढो रान्दे खीर
बारा का बाजार में कोई बुढो रान्दे खीर
दाडी दाडी जळ गई, कोई मुन्छ्यों को तकदीर
ढोला, ढोल मंजीरा
ओ ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ए ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे

Friday, December 26, 2014

समाज सुधारक संत महात्‍मा

रैगर समाज की गौरवगाथा बहुत लम्‍बी है । हमारे समाज में अनेकों मनिषियों का जन्‍म हुआ जिन्‍होंने हमारे समाज के गौरव को चार चाँद लगाए और समाज को गौरवान्वित किया है । उनकी यशो गाथाऐं सदा-सदा के लिए अमर रहती है, अतीत के सुनहरे कल को आज जिन्‍होने प्रेरणा स्‍त्रोत के रूप में दिखाया, ऐसी महानआत्‍माओं को हम कोटी-कोटी प्रणाम करते है जिनके सदकर्मों से समाज गोरवान्वित हुआ है । ऐसे हमारे समाज के महात्‍माओं ने हमारी आने वाली पीढ़ि के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा स्‍त्रोत बनकर समाज को और गौरवशाली बनाते हुए एक आदर्श व अनुपम उदाहरण प्रस्‍तुत किया है । हमारे समाज में अनेको ऐसी विभुतियों हुई है जिन्‍होंने समाज के साथ-साथ देश के लिए भी अपना बलिदान दिया है । हमारे समाज के बन्‍धुओं ने ऐतिहासीक कार्य किए जिन्‍हें आज मिसाल के तोर पर देखा जाता है । हमारे समाज में समाज सुधारक ऐसे कई संत महात्‍मा हुए है उनमें अनुभव के आलोक, आदर्श जीवन की प्रतिभा धर्मगुरू स्‍वामी ज्ञानस्‍वरूपजी महाराज और आदर्श प्रतिभा के धनी त्‍यागमूर्ति स्‍वामी आत्‍मारामजी लक्ष्‍य ने अपना पूरा जीवन सम्‍पर्पित कर दिया ।  रैगर समाज का नाम रोशन किया है जो समाज के लिए गर्व की बात हैं । ऐसी हमारे समाज की महान आत्‍माओं एवं महात्‍माओं ने हमारी आने वाली पीढ़ि के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा स्‍त्रोत बनकर समाज को और गौरवशाली बनाते हुए एक आदर्श व अनुपम उदाहरण प्रस्‍तुत किया है ।

ईश-वन्‍दना


वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्‍य मार्ग पर डट जाएं ।
पर सेवा पर उपकार में हम, निज जीवन सफल बना जाएं ।।
हम दीन दु:खी निबलों विकलों, के सेवक बन सन्‍ताप हरें ।
जो हैं अटके भूले-भटके, उनको तारें खुद तर जाएं ।।
छल दम्‍भ द्वेष पाखंड झूँठ, अन्‍याय से निशि-दिन दूर रहें ।
जीवन हो शुद्ध सरल अपना, शुचि प्रेम सुधा रस बरसाएं ।।
निज आन मान मर्यादा का, प्रभु ध्‍यान रहे अभिमान रहे ।
जिस देश जाति में जन्‍म लिया, बलिदान उसी पर हो जाएं ।।