Thursday, December 1, 2016

राजस्थानी दोहे -1

डाढी पींवता दारू मिस्टर तुक्कल भल्ला ।
आखै दिन होयोड़ा रेंवता चूंच अर लल्ला ॥
ऐक दिन नीं टळता
नीं मिल्यां बै बळता
टिकता तो बस पड्यां मैडमजी रा खल्ला ॥
बाज़ आळी खाली सीसी मांगी पाडोसी ।
थै तो रोज पीओ खाली तो पडी़ होसी ॥
घर में तो आत कोनी
आग्या तो बात कोनी
ल्याओ मंगाओ,खाली करां जल्दी सी ॥
ऊंदरा बोल्या दारू पीवां पैलै तोड़ री ।
दुनियां में होवै कोनी ईं रै जोड़ री ॥
छोड़ां कोनी आ दुआई
छोड़ ई देस्यां लुगाई
लुगाई ई हुवै बेलियो ज़ड झोड़ री ॥
हथकढ री बोतल गटकर डोल्यो ।
चांद धरती माथै उतरसी बोल्यो ॥
ऊंदरी बोली थम
साळा कुत्ता जम
खल्ल खळका चांद भेजूं अण्तोल्यो ॥
बिलड़ी तो ही कोनीं हा फ़गत ऊंदरा ।
दारू आळै ठेकै में मोटी मोटी तूंद रा ॥
दिन मॆ पस्त
रात में मस्त
रोब सूं खांवता होटल में लाडू गूंद रा ॥
गांव में स्सै सूं हुंस्यार हो सरपंच जी रो छोरो ।
आगे रेंवंतो जद होंवतो कोई मंत्री जी रो दोरो ॥
कईयां नैं फ़ंसावंतो
कईयां नै मरवांवतो
काढ्यां बिनां डील में कोई छोटो-मोटो मोरो ॥
बापू बोल्या बोट पडै़ घालर आ रै ।
मोड़ो हुवै खेत नै जल्दी कर जा रै ॥
ढोलकी खनै जद गया
पतळा हा तिसळग्या
खुद पड़्या मांय अर बोट रेग्यो बारै ॥
गोष्ठी री बैस में इस्सी लाम्बी बधी बात ।
कै ताण मारियां ई नीं सुळझी आखी रात ॥
आखतो हो सब्बळियो
सिंझ्या गाडी चढ लियो
निवड़ण सूं पैली दे आयो रूणीचै री जात ॥
झब्बियै री लुगाई ही बोलाक बेजा ।
सामने आळां रा खाय जावंती भेजा ॥
घर में रेवंतो नी कोई
बापडी़ पीवै कीं रो लोई
छात माथै चढ़ बा गाया करती तेजा ॥
झिंडियै री डीकरियां पतळी ही जंचार ।
धरियोडी हुवै जाणै सांगरियां पचार ॥
ऐक-ऐक कर
सै भेळी कर
तूळ्यां आळी पेटी में सुवावंता जंचार ॥
ऐक सी सकल री ही मा अर बेटी ।
फ़ुटरापै में कोई नीं ही जाबक हेटी ॥
आयो जणां जुवाई
करग्यो बो दुवाई
मा नै सागै लेग्यो, घरां रैगी बेटी ॥
जाबक ई भोळो हो बापडो अल्लाद्दीन ।
कूकतो फ़िल्म में देख दर्द आळा सीन ॥
आई मुकळावै री घडी
बीनणी बीं री रो पडी
बोल्यो छोडो बपडी नै म्हैं नी ईंरो बीन ॥
ऊपर सूं नीचै तांईं ऐकसा हा मिस्टर सपडा।
डाडा जंचता जणां पैरता नूआं-नूआं कपडा॥
मावडी मळ उतारिया
बण पेट में उतारिया
घाल्या जियां पाछा आग्या खाया जका बडा ॥
पान खायर रमेसियै लाल कर लिया होट ।
घर आळी देखर बोली ओ जी थानै फ़ोट ॥
पैली कसर ही आ
अब लागो हो लुगाई
ल्यो पैर ल्यो भलांई अब तो ओ पेटीकोट ॥
लूंठा पैलवान हा मिस्टर भूंडा राम भभूत ।
हरा नाख्या बां कुस्ती में पैलवान मजबूत ॥
करता जणां बडाई
आंख काढती लुगाई
डरता होळै सी पैंट में कर देंवता लाई मूत॥
जाबक लिगतो हो बोगड़ सिँह परमार।
हरेक चीज खावण नै रैँ'वतो त्यार ॥
लुगाई कीँ घाल्यो कोनीँ
...जोर कीँ चाल्यो कोनी
रीसां बळतो चाबग्यो लुगाई री सलवार।।
टींगर परनावण चाल्यो भत्तू मल मे'रा।
बीन रूसग्यो बण लिया कोनीँ फेरा ॥
छोरी बोली आ ले
रसमड़ी निभा ले
फेरां सारु नीँ तो भेज दे बापू तेरा॥
अमेरीका रा लूंठा सोखीन मिस्टर डांग ।
गंडक ल्यांता मोल,कई ल्यांता मांग ॥
इण रो होयो असर
सरीर में होगी कसर
मूत करता मतैई उठ जांवती एक टांग ॥
ठुमकर ऊंदरै कन्नै आ कैवण लागी ऊंदरी ।
देखो जी म्हूं लागूं हूं नी आज विश्व सुंदरी ॥
बोल्यो परनै जा रांड
थोबड और आगै मांड
नासां इयां लागै जाणै सीसी हुवै गूंद री ॥
नितनेमी हा पंडत जी दोनूं टैम मांगता आटो ।
छोडता कोनी जे मिल जांवतो डांगरां रो चाटो ॥
कुत्तियां री ही अबखाई
दिक्कत ही तो ही आ ई
ईं सारू राखता साथळ ताईं प्लास्तर रो पाट्टो ॥
चीज मांगतो जणां बोलतो ओ के प्लीज ।
आसूडो इस्सो पढ्यो कै भूलग्यो तमीज ॥
टैम ही भौर री
हाजत ही जोर री
हंगण बैठग्यो पैंट री जाग्यां खोलर कमीज़॥
रसगुल्लां री दुकान खोली प्रभु जी पूर ।
गाहक पटांवतां रै ऊडण लाग्यो बूर ॥
साल भर अड्या रेया
रसगुल्ला सारा पड्या रेया
छेकड जंवतां रा बिकग्या बांरा स्सै पूर ॥
मुर्गी दांईं बांग देंवती मुर्गी बाई पंडा ।
मिनखां में बैठती जद गाळ देंवती गंडा ॥
आप रै सुभाव सूं
नाम रै प्रभाव सूं
दिन में दिया करती बा पांच-सात अंडा ॥
लूंठा कवि हा चूणदान चोटिया ।
सुणाया करता दूहा फ़गत खोटिया ॥
पैली तो खूब गाजता
पछै धोती चक भाजता
सरोता जद चक लेता सोटियो ॥
हज़ामत करावण गयौ डेमलौ डांगी ।
लम्बाई देख हज़ाम निसरनी मांगी ॥
ऐक ऐक पेड़ी चढ़तौ
बोल्यौ बो रड़भड़तौ
राम देखौ,ईं रै कठै जार भौडकी टांगी ॥
दारू रा सौखीन हा भूतड़ जी पडि़हार ।
इण नसै लारै खो लियौ बां परिवार ॥
गळग्या जद गंडा
लेयर झौळी डंडा
माळा फ़ेरण लागग्या जार हरिद्वार ॥
दारू पींवतां जद कीं राख देवंता ढक्कण में ।
ऊंदरा मज़ा लेंवता सेठजी रै ईं लक्खण में ॥
सेठाणी भौत समझावै
मक्खण क्यूं नी भावै
ऊंदरा बोल्या.बी.पी.रो रोग होवै मक्खन में ॥
फ़ोटू खैंचावण स्टूडियो गई चिमली ताई ।
सामनै बैठा,फ़ोटोग्राफ़र मींची आंख डाई ॥
ताई बठै सूं हटगी
फ़ोटू खातर नटगी
बोली,मरज्याणा पैली बण राखीबंद भाई ॥
सैर री ही बीनणी पैली बार देखी डाग ।
झूट में ही डागड़ी मुंडै ऊपड़ै हा झाग ॥
बोली फ़ूट्या करम
ऊंटणी है बेसरम
दोपारां देखो पेस्ट करै,लागौ ईं रै आग ॥
ज़हाज़ री सवारी सारू अंटग्यौ लूधो सहारण ।
रिसाणौ होय भींतां में लाग्यौ टक्कर मारण ॥
लुगाई नै आई रीस
खल्ल टेक्या बीस
बिना ज़हाज़ ई उडग्यौ रोही में भैंसा चारण ॥
बिना बीज धरती माथै पैदा नीं होवै कोई चीज ।
गुलाब जामण में भी होया करै छोटो सो बीज ॥
धणी री सुण पाखती
लुगाई बोली आखती

तो जाओ बीज देओ खेत में कूलर-पंखा-फ़्रीज ॥

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